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एक कानून ऐसा भी, जिसका कभी पालन ही नहीं हुआ उज्जैन में
उज्जैन | स्वतंत्र भारत में बना एक कानून ऐसा भी है, जिसका मध्यप्रदेश की धर्मधानी उज्जैन में कभी पालन ही नहीं हुआ। हम बात कर रहे हैं स्वच्छता कानून की, जिसके तहत सार्वजनिक स्थल पर थूकने वाले से जुर्माना वसूलने का कानूनी प्रावधान तो है मगर उज्जैन के इतिहास में एक भी शख्स से जुर्माना वसूला नहीं गया।
पान-गुटखे की पीक से सरकारी संपत्तियों के संरक्षण और स्वच्छता के प्रति लोगों की आदत में सुधार लाने को भारत सरकार ने सार्वजनिक स्थान पर थूकना प्रतिबंधित कर रखा है। थूकने पर अर्थदंड स्वरूप जुर्माने का निर्धारण और उसे वसूलने का अधिकार स्थानीय नगरीय निकायों को सौंपा रखा है। नगर पालिक अधिनियम की धारा 418 (4) के तहत नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने दस साल पहले 16 अप्रैल 2008 को सभी निकायों को इस संबंध में आदेश जारी किए थे। कार्रवाई स्वरूप उज्जैन नगर निगम ने अर्थदंड 100 रुपए निर्धारित तो किया, मगर किसी भी शख्स से वसूला नहीं। वजह यह नहीं थी कि अर्थदंड के डर से लागों ने सार्वजनिक स्थान पर थूकना बंद कर दिया, बल्कि हकीकत यह रही कि जुर्माना वसूलने में ना अफसरों ने रुचि दिखाई और ना जनप्रतिनिधियों ने। चौकाने वाली बात यह है कि निगम परिषद ने जुर्माना राशि भी नहीं बढ़ने दी। पिछले सम्मेलन में नगर निगम आयुक्त की ओर से जुर्माना राशि 100 से बढ़ाकर 400 रुपए किए जाने के प्रस्ताव को परिषद ने नामंजूर कर दिया।
इन मामलों में 10 लाख रुपए जुर्माना वसूला
सार्वजनिक स्थान पर पेशाब करने, शौच करने, हानिकारक अपशिष्ठ डालने, सड़क पर मवेशी छोड़ने, दुकान के बाहर कचरा फैलाने पर विभिन्न लोगों सेतकरीबन 10 लाख रुपए अर्थदंड वसूला है। ये वसूली भी दो साल में हुई है।
आप भी जानिये किन हरकतों पर कितना है जुर्माना
सार्वजनिक स्थान पर थूकने पर 100 रुपए
सार्वजनिक स्थान पर पेशाब करने पर 250 रुपए
सार्वजनिक स्थान पर शौच करने पर 500 रुपए
सड़क पर मवेशी छोड़ने पर 4000 रुपए
सार्वजनिक स्थान पर अपशिष्ट डालने पर 4000 रुपए
इनका कहना
जो अब तक नहीं हुआ, अब होगा। सार्वजनिक स्थान पर थूकने वालों से भी जुर्माना वसूला जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में निर्देश जारी किए जाएंगे।
-डॉ. विजयकुमार जे., आयुक्त, नगर निगम
धुम्रपान करने पर है 250 रुपए जुर्माना, पर तय ही नहीं कौन वसूलेगा
शासन ने सार्वजनिक स्थल पर धुम्रपान करने पर 250 रुपए जुर्माना तय कर रखा है, मगर इसे कौन वसूलेगा यह 10 वर्ष बाद भी उज्जैन में स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम धुम्रपान तो हो रहा, मगर जुर्माना वसूल नहीं। हालांकि इस जुर्माने के प्रति लोगों को आगाह कराने के लिए कलेक्टर साल में दो बार सूचना जरुर जारी कराते रहे हैं। मामले में कलेक्टर संकेत भोंडवे ने कहा कि सभी विभागों के अधिकारियों को जुर्माना वसूलने का अधिकार दे रखा है। बात अगर टावर चौक, शहीद पार्क, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक क्षेत्र की है तो ऐसी जगहों पर धुम्रपान करने वालों से जुर्माना वसूलने का अधिकार नगरीय निकाय को है। हालांकि नगर निगम अध्यक्ष सोनू गेहलोत ने साफ कहा है कि निगम को इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। इसलिए निगम ने जुर्माना वसूला भी नहीं।